पटना. बिहार की सियासत में चेहरे बदलते हैं, गठबंधन बदलते हैं, लेकिन एक नाम जो पिछले साढ़े तीन दशकों से अडिग खड़ा है, वह है बिजेंद्र प्रसाद यादव. सूबे में नई सरकार के गठन के साथ ही जेडीयू के इस कद्दावर नेता को उपमुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई है. सुपौल की धरती से लगातार विधानसभा पहुंचने वाले बिजेंद्र यादव का डिप्टी सीएम बनना उनके उस अजेय सफर का सम्मान है जिसने कोसी अंचल की राजनीति की दिशा तय की है.
जेपी आंदोलन की उपज और प्रशासनिक दक्षता
बिजेंद्र प्रसाद यादव की राजनीतिक जड़ें 1974 के जेपी आंदोलन में समाहित हैं.
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शुरुआत: छात्र राजनीति से मुख्यधारा में आए बिजेंद्र यादव ने 1990 में पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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अनुभव: उन्होंने लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सरकारों में भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया. 2005 में जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली, तब वे जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूती दे रहे थे.
चुनावी रिकॉर्ड: हर पिच पर मारा छक्का
बिजेंद्र यादव को राजनीति का वह खिलाड़ी माना जाता है जो हर समीकरण को साधने में माहिर है.
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अजेय सफर: 1990 से लेकर 2025 तक, उन्होंने कांग्रेस, राजद और यहाँ तक कि गठबंधन न होने पर बीजेपी के दिग्गजों को भी भारी मतों से पराजित किया.
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कोसी का भरोसा: कोसी की जनता उन्हें प्यार से ‘कोसी का विश्वकर्मा’ कहती है, जिन्होंने इलाके में बिजली और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया.
‘ऊर्जा पुरुष’ से उप-मुख्यमंत्री की नई भूमिका
नीतीश सरकार में बिजली के क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों के पीछे बिजेंद्र यादव की दूरदर्शिता रही है. इसी कारण उन्हें बिहार का ‘ऊर्जा पुरुष’ कहा जाता है. अब बतौर डिप्टी सीएम, उनके कंधों पर न केवल ऊर्जा विभाग बल्कि राज्य के विकास का बड़ा रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी होगी.
अनुभव की इस पाठशाला से निकले बिजेंद्र यादव का यह नया अवतार बिहार एनडीए सरकार के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होगा. उनके शपथ ग्रहण के साथ ही पूरे कोसी क्षेत्र में जश्न का माहौल है.
