पलामू में प्रशासनिक फैसले पर भड़के लोग: किशुनपुर ओपी का बोर्ड बदलकर लिखा गया ‘पिकेट’; थाना बनने की उम्मीदों पर फिरा पानी

झारखंड

पलामू. जिले के पाटन क्षेत्र अंतर्गत किशुनपुर से एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आ रहा है. प्रशासनिक आदेश के बाद किशुनपुर आउटपोस्ट (ओपी) को दोबारा पुलिस पिकेट में तब्दील कर दिया गया है. इस फैसले के तहत बुधवार को गेट और मुख्य बोर्ड से ‘ओपी’ शब्द हटाकर वहां ‘पिकेट’ लिख दिया गया, जिसके बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों में भारी रोष और नाराजगी देखी जा रही है.

थाना बनने की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका

स्थानीय लोगों का कहना है कि किशुनपुर को ओपी बनाए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में इसे पूर्णकालिक थाना का दर्जा मिलेगा. पाटन उग्रवाद प्रभावित और एक बड़े क्षेत्रफल वाला इलाका रहा है, ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से इसे अपग्रेड करने के बजाय डाउनग्रेड (पीछे धकेलना) करने का फैसला आम जनता की समझ से परे है.

पूर्व मंत्री राधाकृष्ण किशोर के प्रयास से हुई थी शुरुआत

किशुनपुर में पुलिस बल की तैनाती का इतिहास इलाके की सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ है:

  • स्थापना: सूबे के पूर्व वित्त सह संसदीय कार्यमंत्री व तत्कालीन विधायक राधाकृष्ण किशोर और तत्कालीन डीजीपी विष्णुदयाल राम के विशेष प्रयासों से इस अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वर्ष 2009 में किशुनपुर पिकेट की स्थापना की गई थी.

पिकेट से ओपी और अब फिर पिकेट का सफर

पाटन थाना क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा होने के कारण अपराध और उग्रवाद पर काबू पाना हमेशा से पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. इसी को देखते हुए समय-समय पर बदलाव किए गए:

  1. 2009 से 2017: यह क्षेत्र पुलिस पिकेट के रूप में संचालित होता रहा.

  2. 2018 में बना ओपी: साल 2018 में पलामू के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) इंद्रजीत महथा ने जनभावनाओं और सुरक्षा को देखते हुए इसे अस्थायी ओपी के रूप में अपग्रेड किया था.

  3. हालिया अपग्रेड: पूर्व एसपी रीष्मा रमेसन ने यहाँ सब-इंस्पेक्टर (पुअनि) स्तर के अधिकारी को प्रभारी नियुक्त किया था, जिससे लोगों में इसके जल्द थाना बनने की उम्मीदें बढ़ गई थीं.

ग्रामीणों ने जताया विरोध

बुधवार को अचानक बोर्ड पर ‘किशुनपुर ओपी’ की जगह ‘किशुनपुर पिकेट’ लिखा देखकर ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया. इलाके के लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ 2007 में बने नावाजयपुर पिकेट को 2015 में थाना बना दिया गया, वहीं किशुनपुर के साथ यह प्रशासनिक सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ग्रामीणों ने इस फैसले को वापस लेने और किशुनपुर को अविलंब थाना घोषित करने की मांग की है.

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