जमशेदपुर में बवाल: बारीगोड़ा रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर धरना; आक्रोशित ग्रामीणों ने टायर जलाकर की नारेबाजी, उग्र आंदोलन की चेतावनी

झारखंड

जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर (टाटानगर) अंतर्गत बारीगोड़ा रेलवे फाटक के पास रहने वाले लाखों लोगों के सब्र का बांध आखिरकार रविवार को टूट गया. क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग को लेकर स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और भारी संख्या में बस्तीवासियों ने रेलवे फाटक के समीप जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. इस दौरान रेलवे प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की वादाखिलाफ़ी के खिलाफ आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया और जमकर नारेबाजी की.

शिलान्यास के तीन साल बीते, पर धरातल पर नहीं दिखी एक ईंट

प्रदर्शन में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि बारीगोड़ा रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण कराने के लिए आज से ठीक तीन साल पहले भव्य शिलान्यास किया जा चुका है.

  • अधर में लटकी योजना: शिलान्यास के वक्त रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया था कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर इसे समय पर पूरा कर लिया जाएगा.

  • वादाखिलाफी से नाराजगी: तीन साल की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी साइट पर निर्माण से जुड़ी कोई गतिविधि शुरू नहीं हुई है, जिससे क्षेत्र की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि रेलवे जल्द से जल्द इस योजना को धरातल पर उतारे ताकि करीब डेढ़ से दो लाख की आबादी को दैनिक जाम से राहत मिल सके.

फाटक बंद रहने से एम्बुलेंस और मरीज भी फंसते हैं, शहर से कट जाता है संपर्क

बारीगोड़ा क्षेत्र की स्थानीय मुखिया सुनीता नाग ने धरने का नेतृत्व करते हुए जनता की बुनियादी और व्यावहारिक समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा:

  1. घंटों का जाम: इस व्यस्त रेलखंड पर भारी संख्या में ट्रेनों की आवाजाही के कारण बारीगोड़ा फाटक दिनभर में अधिकांश समय बंद ही रहता है.

  2. सड़क संपर्क बाधित: फाटक बंद रहने की वजह से इस पार रहने वाले लाखों लोग पूरी तरह से मुख्य जमशेदपुर शहर से कटे रहते हैं और वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं.

  3. स्वास्थ्य आपातकाल में आफत: सबसे विकट स्थिति तब पैदा होती है जब बस्ती क्षेत्र के किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को लेकर एम्बुलेंस को अस्पताल जाना होता है. बंद फाटक के कारण एम्बुलेंस घंटों जाम में फंसी रहती है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है.

ठोस पहल नहीं हुई तो थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

मुखिया सुनीता नाग ने रेलवे और स्थानीय जिला प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आज का यह धरना और टायर जलाकर किया गया प्रदर्शन केवल एक सांकेतिक (Symbolic) विरोध था.

बस्तीवासियों ने साफ कर दिया है कि यदि इस प्रदर्शन के बाद भी रेलवे प्रबंधन नींद से नहीं जागता है और ओवरब्रिज निर्माण कार्य को तत्काल शुरू करने की दिशा में कोई लिखित या ठोस प्रशासनिक पहल नहीं की जाती है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन बेहद उग्र रूप अख्तियार करेगा. अगले चरण में ग्रामीण आर्थिक नाकेबंदी और चक्का जाम करने के साथ-साथ रेलवे ट्रैक को भी बाधित करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी.

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