रांची. केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शनिवार को रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) स्थित आश्रयगृह का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान आश्रयगृह में फैली भारी अव्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई. मंत्री ने परिसर में बंद पड़ी लिफ्ट, कॉरिडोर में जगह-जगह जमा बारिश के पानी और कैंटीन के खराब संचालन को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि इस आश्रयगृह को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों के परिजनों को मात्र 10 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान में यहां नियमों को ताक पर रखकर अधिक कीमत वसूली जा रही है.
संजय सेठ ने कैंटीन प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यह आश्रयगृह मरीजों की सेवा के लिए है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था को देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे रेस्टोरेंट की तरह संचालित कर कमाई का जरिया बना लिया गया हो. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि गरीबों की लाचारी को कमाई का जरिया न बनाएं.
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर साधा निशाना, कहा- चुप्पी साध कर बैठे हैं
निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए:
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व्यवस्था सुधारने की नसीहत: संजय सेठ ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी द्वारा रिम्स और पूरे स्वास्थ्य विभाग का संचालन किया जाता है, जिनके द्वारा अक्सर बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं. लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है.
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गरीबों के साथ धोखा: उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि रिम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इलाज कराने आ रहे गरीब मरीजों और उनके परिजनों के साथ इस तरह का धोखा हो रहा है और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा, “स्वास्थ्य मंत्री जी, राज्य की सियासत बाद में भी होती रहेगी, पहले रिम्स की व्यवस्था को संभालिए.”
रिम्स निदेशक को दिए सख्त निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने मौके पर ही रिम्स के निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा को तलब किया. उन्होंने निदेशक को स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पताल और आश्रयगृह में आने वाले हर गरीब मरीज और उनके परिजनों को एक सम्मानजनक और साफ-सुथरा वातावरण मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित बेहद सस्ती दरों पर रहने और भोजन की उत्तम सुविधा हर हाल में सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसी भी जरूरतमंद का शोषण न हो सके.
