JPSC धांधली में CBI चार्जशीट के चौंकाने वाले खुलासे: दो दशक से जारी है गड़बड़ी का खेल; वीआईपी रिश्तेदारों की भर्ती से लेकर गायब कंप्यूटर तक, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

रांची

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अनियमितताओं और धांधली का सिलसिला पिछले दो दशकों से बदस्तूर जारी है. हाल ही में सीआईडी (CID) की छापेमारी, उप परीक्षा नियंत्रक और परीक्षा एजेंसी TDPL के निदेशक की गिरफ्तारी के बीच दो साल पहले सीबीआई (CBI) द्वारा अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट की परतें एक बार फिर सामने आई हैं. लगभग 12 वर्षों तक गहन जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड छिपाए गए, नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं और वीआईपी हस्तियों के अपात्र रिश्तेदारों को नियमों को ताक पर रखकर पदों पर बिठाया गया.

ताज्जुब की बात यह है कि सीबीआई द्वारा दो साल पहले ही चार्जशीट कोर्ट को सौंप दिए जाने के बावजूद इस मामले में अब तक ट्रायल (न्यायिक सुनवाई) शुरू नहीं हो सका है.

CBI की जांच रिपोर्ट के 5 सबसे बड़े खुलासे
1. गोपनीयता के नाम पर रिकॉर्ड गायब: आयोग ने सीबीआई को यह जानकारी तक नहीं दी कि इंटरव्यू बोर्ड का गठन किस आधार पर हुआ. इतना ही नहीं, अधिकारियों और सदस्यों के रिश्तेदार परीक्षा में बैठे थे या नहीं, इसका रिकॉर्ड भी गोपनीयता का हवाला देकर छिपा लिया गया.

2. बिना मेमोरी वाली OMR मशीन और गायब हुआ कंप्यूटर: OMR स्कैनिंग के लिए लाई गई मशीन में अपनी मेमोरी नहीं थी. इसे एक कंप्यूटर से जोड़कर मनचाहा प्रोग्राम रन किया जा सकता था. स्कैनिंग का काम निजी कंप्यूटर पर धीरज कुमार नामक व्यक्ति ने किया. जेपीएससी से हटने के बाद वह कंप्यूटर साथ ले गया, जिसे सीबीआई आज तक बरामद नहीं कर सकी.

3. बैकडेटेड लेटर से फर्जी एजेंसी का चयन: पहली परीक्षा में ‘मेसर्स आइकॉन्स’ और दूसरी में ‘NCCF’ एजेंसी को काम सौंपा गया. एजेंसी चयन का 15 जून 2006 का पत्र मूल फाइल में दर्ज ही नहीं था. सीबीआई ने जांच में इसे बैकडेटेड (पुराणी तारीख में तैयार किया गया फर्जी दस्तावेज) पाया.

4. गर्मी की छुट्टियों में वाराणसी में गुपचुप कॉपियों का मूल्यांकन: मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं चोरी-छिपे वाराणसी भेजी गईं. मई से जुलाई 2007 के दौरान जब विश्वविद्यालय बंद थे, तब बिना अनुमति इतिहास विभाग परिसर में कॉपियां जांची गईं.

5. इंटरव्यू बोर्ड में मनमाने अंक: इंटरव्यू पैनल के गठन में विनियम, 2002 का उल्लंघन हुआ. एक ही अभ्यर्थी को अलग-अलग सदस्यों द्वारा दिए गए अंकों में 10 से लेकर 180 अंकों तक का भारी अंतर पाया गया, जो सामान्य प्रक्रिया में असंभव है.

हाई-प्रोफाइल हस्तियों के रिश्तेदारों की संदेहास्पद नियुक्तियां
सीबीआई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2006 से 2008 के बीच डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और सेल्स टैक्स ऑफिसर जैसे प्रमुख पदों पर अपात्र अभ्यर्थियों का चयन किया गया.

संदेह के घेरे में आईं प्रमुख नियुक्तियां:

जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के भाई

आयोग सदस्य गोपाल प्रसाद और शांति देवी के रिश्तेदार

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के पीएस व रिश्तेदार

पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के भाई

पूर्व विधायक राधाकृष्ण किशोर के भाई

सीबीआई ने इन सभी नियुक्तियों को संदेहास्पद मानते हुए चार दर्जन (48 से अधिक) से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी.

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