रांची. रांची-लोहरदगा रेलखंड पर नियमित रूप से चलने वाली मेमू (MEMU) पैसेंजर ट्रेनों की लगातार बढ़ती लेटलतीफी इन दिनों दैनिक यात्रियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुकी है. इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले सैकड़ों नौकरीपेशा लोग, विभिन्न कॉलेजों के छात्र, गंभीर बीमारियों के मरीज और छोटे-बड़े व्यवसायी ट्रेन की टाइमिंग बिगड़ने के कारण समय पर अपने गंतव्य (ऑफिस, अस्पताल, कॉलेज) नहीं पहुंच पा रहे हैं. सबसे भयावह स्थिति उन रेल यात्रियों की हो रही है, जिन्हें रांची या हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचकर देश के अन्य महानगरों के लिए लंबी दूरी की सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेनें पकड़नी होती हैं. मेमू के घंटों लेट होने की वजह से यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें लगातार मिस हो रही हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक चोट के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है.
रोजाना प्रभावित हो रहे सैकड़ों दैनिक यात्री; बिगड़ रही है पूरी दिनचर्या
लोहरदगा-रांची रेल सेवा का परिचालन इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ा हुआ है, जिस पर हर वर्ग के लोग आश्रित हैं:
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कर्मचारियों और छात्रों को नुकसान: इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में सरकारी व निजी सेक्टर्स के कर्मचारी दफ्तरों के लिए और छात्र-छात्राएं राजधानी के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के लिए यात्रा करते हैं. लेकिन मेमू की अनिश्चितता के चलते उनकी बायोमेट्रिक हाजिरी और कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं.
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मरीजों की बढ़ी आफत: लोहरदगा और गुमला क्षेत्र के जो मरीज रांची के रिम्स (RIMS) या अन्य बड़े अस्पतालों में डॉक्टर की ओपीडी (OPD) का अपॉइंटमेंट लेकर आते हैं, वे ट्रेन लेट होने से समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते.
[ट्रेन की लगातार लेटलतीफी] ───> [रांची/हटिया स्टेशन पर देरी से पहुंचना]
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[आर्थिक नुकसान + टिकट कैंसिलेशन] <─── [लंबी दूरी की कनेक्टिंग ट्रेनों का छूटना]
कनेक्टिंग ट्रेनों के छूटने से दोहरा आर्थिक नुकसान, प्लेटफॉर्म पर कट रही रातें
रेलवे की इस लचर समय-पालन (Punctuality) व्यवस्था की सबसे ज्यादा मार उन यात्रियों पर पड़ रही है, जो रांची को एक ट्रांजिट स्टेशन के रूप में इस्तेमाल करते हैं:
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महानगरों की ट्रेनें मिस: यात्रियों को रांची से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, भुवनेश्वर और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लिए पहले से आरक्षित (Reserved) ट्रेनों में सफर करना होता है.
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कैंसिलेशन और रिफंड की मार: कनेक्टिंग मेमू के लेट होने से प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से पहले ही उनकी मुख्य ट्रेन खुल चुकी होती है. इसके कारण यात्रियों को न सिर्फ अपनी महंगी कंफर्म टिकटें रद्द करानी पड़ रही हैं, बल्कि भारी भरकम कैंसिलेशन चार्ज भी उठाना पड़ रहा है. तत्काल में दोबारा टिकट लेने या कई घंटों/दिनों तक अगली ट्रेन के लिए स्टेशन पर ही भटकने के कारण यात्रियों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है.
सड़क मार्ग अपनाने को मजबूर हो रहे हैं लोग; रेल प्रशासन से समयबद्धता की गुहार
स्थानीय यात्रियों और रेल संगठनों का कहना है कि जब इस रेलखंड पर ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण कर मेमू सेवा शुरू की गई थी, तब लोगों को लगा था कि उन्हें सड़क मार्ग के महंगे और असुरक्षित सफर की तुलना में तेज, सस्ती, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का बेहतरीन विकल्प मिल गया है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से जारी ट्रेनों के खराब परिचालन ने इस सुविधा को एक बड़ी मुसीबत में बदल दिया है.
यात्रियों की रेलवे प्रशासन से मुख्य मांगें: यात्रियों ने दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के वरीय अधिकारियों और रांची रेल मंडल के डीआरएम (DRM) से अपील की है कि रांची-लोहरदगा मेमू ट्रेनों की समय सारिणी की नियमित समीक्षा की जाए और इसके परिचालन की समयबद्धता सुनिश्चित की जाए. यात्रियों का कहना है कि यदि ट्रेनों के समय-पालन में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो लोग मजबूरी में घाटा सहकर भी दोबारा बसों और निजी वाहनों (सड़क मार्ग) का रुख करने लगेंगे, जिससे रेलवे के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचेगा.
