बंगाल चुनाव: चंपाई सोरेन का ‘माछ-भात’ डिप्लोमेसी. ममता बनर्जी के ‘फूड बैन’ नैरेटिव को भाजपा का करारा जवाब

झारखंड

कोलकाता/झारग्राम. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब महज 48 घंटे का समय शेष है. इस बीच बंगाल की संस्कृति और खान-पान को लेकर ‘नैरेटिव’ की जंग तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झारग्राम में ‘झालमुड़ी’ खाते तस्वीर के बाद अब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की ‘माछ-भात’ (मछली-चावल) खाते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है.

ममता बनर्जी के आरोप का जवाब: यह तस्वीर तब सामने आई है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी रैलियों में यह दावा किया है कि यदि बंगाल में भाजपा की सरकार आती है, तो वे मीट, मछली और अंडा खाने पर प्रतिबंध लगा देंगे. चंपाई सोरेन ने एक्स (X) पर अपनी तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन लिखा— “पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के बीच माछ-भात का आनंद लेते हुए.” भाजपा का सांस्कृतिक दांव: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा बंगाल के जनमानस से जुड़ने के लिए वहां की स्थानीय जीवनशैली को अपना रही है:

  • झालमुड़ी और माछ-भात: पीएम मोदी और चंपाई सोरेन द्वारा बंगाल के प्रिय व्यंजनों का आनंद लेना टीएमसी के उस प्रचार को काउंटर करने की कोशिश है, जिसमें भाजपा को ‘बाहरी’ और ‘बंगाली संस्कृति विरोधी’ बताया जा रहा है.

  • सोशल मीडिया पर वायरल: खड़गपुर से लेकर झारग्राम तक इस तस्वीर की चर्चा हो रही है. नेटिज़न्स इसे टीएमसी की ‘डर की राजनीति’ का सटीक जवाब बता रहे हैं.

चुनाव का गणित: पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए दो मुख्य चरणों में मतदान होना है:

  • पहला चरण: 23 अप्रैल 2026.

  • दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026.

  • परिणाम: 4 मई 2026.

बंगाल की सत्ता के इस महासंग्राम में खान-पान की यह ‘डिश-पॉलिटिक्स’ कितनी कारगर साबित होती है, यह तो 4 मई को ही साफ होगा. लेकिन फिलहाल, माछ-भात की इस तस्वीर ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है.

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