धनबाद. वासेपुर के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर फहीम खान को जेल से रिहा करने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है.
सोमवार (20 जुलाई 2026) को सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने राज्य सरकार के वकील जयंत मोहन और फहीम खान के वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. इस फैसले के बाद धनबाद के गैंगस्टर फहीम खान की रिहाई की राह पूरी तरह से साफ हो गई है.
1984 बनाम 2007 की रिमिशन नीति पर अटका था पेंच
इससे पहले 7 नवंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकलपीठ ने फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर जेल से रिहा करने का आदेश दिया था:
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हाईकोर्ट की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि राज्य की रिहाई समीक्षा बोर्ड ने फहीम खान की रिहाई खारिज करने के लिए 2007 की संशोधित रिमिशन नीति को आधार बनाया था, जो पूरी तरह गलत था.
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1984 की नीति लागू होगी: अदालत ने तर्क दिया कि सगीर हत्याकांड का फैसला सत्र न्यायालय ने 15 जून 1991 को सुनाया था, इसलिए फहीम खान पर 1984 की रिहाई नीति लागू होनी चाहिए, न कि 2007 की नीति.
निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी जब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, तो फहीम खान ने अवमानना (Contempt) याचिका दायर की. इसके बाद राज्य सरकार ने 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से उसे राहत नहीं मिली.
क्या था सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड?
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10 मई 1989: धनबाद के वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
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वर्ष 2009: झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को इस हत्याकांड में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
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21 अप्रैल 2011: सुप्रीम कोर्ट ने भी फहीम खान की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था.
अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम और ऐतिहासिक फैसले के बाद फहीम खान की जेल से रिहाई तय मानी जा रही है. यह मामला पुराने मुकदमों में जेल रिमिशन (समय पूर्व रिहाई) की नीतियों को लागू करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
