कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा चरम पर है. इस बीच, चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदान केंद्रों पर पहचान छुपाकर वोट डालने की कोशिश करने वालों पर पैनी नजर रहेगी. आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी मतदाता की पहचान को लेकर थोड़ा भी संदेह होता है, तो उसे अपना चेहरा दिखाना होगा. यह नियम विशेष रूप से उन मतदाताओं के लिए है जो बुर्का या घूंघट पहनकर बूथ पर पहुँचते हैं.
निजी गोपनीयता का रखा जाएगा ख्याल: चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि महिला मतदाताओं की निजता (Privacy) का पूरा सम्मान किया जाएगा.
-
महिला कर्मी करेंगे जांच: चेहरा देखने का काम केवल महिला मतदान कर्मी ही करेंगी. इसके लिए हर बूथ पर कम से कम एक महिला अधिकारी की तैनाती अनिवार्य की गई है.
-
विशेष घेरा (Enclosure): यदि कोई महिला अन्य पुरुषों के सामने चेहरा दिखाने में असहज होती है, तो उनकी पहचान के सत्यापन के लिए बूथ के अंदर एक छोटा पर्दा या घेरा बनाया जाएगा.
संवेदनशील बूथों पर विशेष नजर: बंगाल में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
-
अत्यंत संवेदनशील बूथ: राज्य में लगभग 8,500 अत्यंत संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान की गई है.
-
CCTV और सुरक्षा: इन केंद्रों पर विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे.
-
भीड़ नियंत्रण: बूथों पर अनावश्यक भीड़भाड़ रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को ‘अलर्ट मोड’ पर रहने को कहा गया है.
राजनीतिक विवाद और पृष्ठभूमि: आपको बता दें कि इस मुद्दे पर पहले भी बिहार और उत्तर प्रदेश के चुनावों के दौरान तीखी बहस हो चुकी है. विपक्षी दलों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश बताया था, जबकि चुनाव आयोग और अन्य दलों का तर्क है कि यह निष्पक्ष चुनाव के लिए एक मानक प्रक्रिया (SOP) है.
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे.
