दिल्ली में खौफनाक हादसा: सैद-उल-अजायब में ढह गई कोचिंग सेंटर और कैफे वाली इमारत, मलबे में दबकर 4 की मौत; MCD के JE और AE सस्पेंड

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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से से शनिवार शाम एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा सामने आया है. यहाँ साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैद-उल-अजायब (Saidulajab) इलाके में एक बहुमंजिला इमारत भरभराकर जमींदोज हो गई. इस भीषण हादसे में अब तक चार लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

इस बड़े हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्माण कार्यों की निगरानी में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में दो जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है.

निगरानी में लापरवाही: एमसीडी के दो इंजीनियर सस्पेंड

हादसे की भयावहता को देखते हुए एमसीडी के दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर ने प्रशासनिक कार्रवाई की है:

  • अमन जैन (जूनियर इंजीनियर – बिल्डिंग डिपार्टमेंट-II): इन्हें क्षेत्र में अवैध या असुरक्षित निर्माण पर नजर न रखने, अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और ढिलाई बरतने के आरोप में सस्पेंड किया गया है.

  • सुदेश सिंह चौहान (असिस्टेंट इंजीनियर – बिल्डिंग डिपार्टमेंट-II): इन्हें जूनियर इंजीनियर के कार्यों की प्रभावी निगरानी (सुपरविजन) न करने और प्रशासनिक शिथिलता बरतने के आधार पर निलंबित किया गया है.

ऊपरी मंजिल पर चल रहा था कंस्ट्रक्शन, नीचे थे कोचिंग सेंटर और कैफे

दक्षिणी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) अनंत मित्तल से मिली जानकारी के अनुसार, सैदुलजाब क्षेत्र के वेस्टर्न मार्ग की गली नंबर 5 में स्थित यह इमारत शनिवार शाम को अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई:

  • भवन का कमर्शियल इस्तेमाल: इस बहुमंजिला इमारत के भीतर एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान, एक कैफे और कई अन्य व्यावसायिक कार्यालय (ऑफिस) संचालित हो रहे थे.

  • हादसे का कारण: चश्मदीदों के मुताबिक, घटना के वक्त इस जर्जर इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर कुछ अतिरिक्त निर्माण कार्य (कंस्ट्रक्शन) कराया जा रहा था, जिसका दबाव न झेल पाने के कारण पूरी बिल्डिंग ढह गई. हालांकि, तकनीकी कारणों की जांच अभी जारी है.

मलबे के ढेर में तब्दील हुई बिल्डिंग, कैंटीन पर गिरा भारी मलबा

टक्कर और गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि पूरा इलाका दहल उठा. देखते ही देखते भव्य इमारत मलबे के ऊंचे ढेर में तब्दील हो गई:

  • छात्रों पर मंडराया संकट: बिल्डिंग का एक बड़ा और भारी हिस्सा पास ही स्थित टीन शेड वाली एक कैंटीन पर जा गिरा. इस कैंटीन में अक्सर नीट (NEET) और अन्य मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं चाय-नाश्ते के लिए इकट्ठा होते थे.

एम्स ट्रॉमा सेंटर में घायलों का इलाज, रात भर चला ‘कमांडो’ रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई. सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), दिल्ली जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), दिल्ली पुलिस और स्थानीय नागरिक सहायता टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला:

  1. भारी मशीनों का इस्तेमाल: मलबे के नीचे दबे जिंदगियों को बचाने के लिए क्रेन, हाइड्रोलिक कटर, अत्याधुनिक लाइफ-डिटेक्टर कैमरों और दिल्ली पुलिस के खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की मदद ली गई. यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी रात युद्धस्तर पर चलता रहा.

  2. रेस्क्यू हुआ खत्म: अधिकारियों ने रविवार को स्पष्ट किया कि मलबे से सभी पीड़ितों और शवों को बाहर निकाले जाने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया है.

हादसे में घायल हुए सभी नागरिकों को तुरंत मलबे से निकालकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका इलाज कर रही है. दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक और ठेकेदार के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

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