गुमला. झारखंड के गुमला जिले से अंधविश्वास और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो किसी की भी रूह कंपा दे. यहाँ चैनपुर थाना क्षेत्र में एक युवक को कुत्ते के काटने के बाद समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के चक्कर में पड़े रहे. नतीजा यह हुआ कि युवक के शरीर में रेबीज का संक्रमण पूरी तरह फैल गया और वह इंसानी व्यवहार छोड़ पागलों की तरह लोगों पर भौंकने और काटने के लिए दौड़ने लगा.
अनाज लोड करने के दौरान कुत्ते ने काटा था
मामला चैनपुर प्रखंड के बरवे नगर मुंडाटोली का है, जहाँ का रहने वाला 27 वर्षीय गुलशन लोहार मजदूरी करता है.
-
घटना: बीते 16 मई को गुलशन अपने मालिक विकास कुमार के साथ जारी थाना क्षेत्र के भिखमपुर गांव में मजदूरी करने गया था. वहाँ गाड़ी में अनाज की बोरियां लोड करने के दौरान एक आवारा कुत्ते ने उसके हाथ में बुरी तरह काट लिया था.
अस्पताल के बजाय झाड़-फूंक और शराब का सेवन
घटना के तुरंत बाद गुलशन को एंटी-रेबीज इंजेक्शन (Anti-Rabies Vaccine) दिलवाने के बजाय परिजनों ने उसे गांव के ही ओझा-गुणी से झाड़-फूंक कराना शुरू कर दिया. इस बीच गुलशन लगातार देसी शराब का सेवन भी करता रहा, जिससे जहर तेजी से उसके दिमाग तक पहुंच गया. 20 मई को उसकी हालत बेहद भयावह हो गई:
-
आक्रामक व्यवहार: युवक अचानक हिंसक हो गया और सामने आने वाले हर व्यक्ति को देखकर कुत्तों की तरह भौंकने और काटने दौड़ने लगा.
-
हाइड्रोफोबिया के लक्षण: पानी देखते ही वह डर के मारे चीखने-चिल्लाने लगता था. हालात बेकाबू होते देख परिवार वालों ने किसी तरह उसके हाथ-पैर रस्सी से बांधे.
डॉक्टरों ने कहा- ‘हाइड्रोफोबिया’ हुआ, रिम्स रेफर
बुधवार रात को परिजन उसे इसी हालत में गुमला सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. यहाँ तैनात डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की कि युवक रेबीज संक्रमण की आखिरी स्टेज यानी “हाइड्रोफोबिया” (पानी से डर लगना) का शिकार हो चुका है. प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची रेफर कर दिया. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने पर तत्काल (24 घंटे के भीतर) वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है, अन्यथा यह बीमारी 100% जानलेवा साबित होती है.
रेफर होने के बाद 2 घंटे तक नहीं मिली 108 एंबुलेंस
इस गंभीर आपातकालीन स्थिति में भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली देखने को मिली. रिम्स रेफर किए जाने के बाद पीड़ित परिवार करीब दो घंटे तक सरकारी ‘108 एंबुलेंस’ सेवा के लिए भटकता रहा, लेकिन कोई वाहन नहीं पहुंचा. आखिरकार, रात करीब 10 बजे परिजनों ने भारी नाराजगी के बीच खुद के खर्च पर एक निजी वाहन (प्राइवेट गाड़ी) की व्यवस्था की और तड़पते हुए युवक को लेकर रांची के लिए रवाना हुए.
