Lohardaga News: झारखंड के लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत पाखर पंचायत के तिसिया गांव में चार दिवसीय शिव मंडा पूजा के तहत गुरुवार और शुक्रवार मध्य रात्रि 2 बजे भक्तों ने फुलकुंदी में दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया. विधि-विधान से हुई पूजा इससे पूर्व मुख्य पुरोहित उत्तम पाठक और उज्ज्वल पाठक ने विधिवत पूजा कराई. तिसिया में शिव मंडा पूजा समिति के तत्वावधान में चार दिवसीय मंडा पूजा में मंगलवार को मंदिर से भगवान शंकर, माता पार्वती और नंदी को लाकर मंडा पूजा स्थल पर स्थापित कर विधिवत पूजा की गई. निर्जला उपवास गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि फुलकुंदी का मुख्य आयोजन हुआ. जहां भक्तों ने निर्जला उपवास रखकर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना की और धधकते आग पर चलकर भक्ति का अद्वितीय प्रदर्शन किया. कर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना की और धधकती आग पर चलकर भक्ति का अद्वितीय प्रदर्शन किया. इस दौरान समूचा क्षेत्र भक्तिमय हो गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच एक के बाद एक भक्त अंगारों से होकर आस्था प्रकट की. हजारों की संख्या में लोग मौजूद इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे. वहीं अतिथि के तौर पर नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव,जिला परिषद सदस्य संदीप गुप्ता,थाना प्रभारी मानस कुमार साधु मौजूद थे.

झारखंड

लोहरदगा: जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत पाखर पंचायत के तिसिया गांव में चार दिवसीय शिव मंडा पूजा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि करीब 2 बजे इस पूजा का मुख्य आकर्षण ‘फुलकुंदी’ अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसमें दर्जनों भक्तों ने निर्जला उपवास रखकर दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।

इससे पूर्व मुख्य पुरोहित उत्तम पाठक और उज्ज्वल पाठक द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। मंडा पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव, जिला परिषद सदस्य संदीप गुप्ता और थाना प्रभारी मानस कुमार साधु उपस्थित रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंडा पूजा की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो समाज की खुशहाली और बेहतर फसल की कामना के लिए की जाती है।

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