सरायकेला: सरकारी उपेक्षा का शिकार बनी ‘अर्जुन लाइब्रेरी’; जर्जर भवन में भविष्य संवार रहे छात्र, अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों से की मरम्मत की मांग

झारखंड

सरायकेला. सरायकेला प्रखंड के मुरुप गांव स्थित अर्जुन लाइब्रेरी का भवन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कभी युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से बना यह पुस्तकालय अब मरम्मती और रंग-रोगन के अभाव में जर्जर हो चुका है. लाइब्रेरी के अध्यक्ष हेमसागर प्रधान ने जिले के जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर खींचते हुए भवन के जीर्णोद्धार की मांग की है.

2001 के बाद नहीं हुई सुध

अध्यक्ष हेमसागर प्रधान ने बताया कि इस लाइब्रेरी भवन का निर्माण वर्ष 2001 में खरसावां के तत्कालीन विधायक अर्जुन मुंडा के विधायक निधि से कराया गया था.

  • उपेक्षा की मार: निर्माण के बाद पिछले 23 वर्षों में एक बार भी इस भवन की रंगाई-पुताई या मरम्मत नहीं कराई गई है.

  • श्रमदान का सहारा: पिछले साल स्थानीय युवाओं ने खुद चंदा और श्रमदान कर भीतरी हिस्से की पुताई की थी, लेकिन वह भी अब खराब हो चुकी है.

छात्रों के लिए है ‘फ्री कोचिंग’ और करियर का केंद्र

संसाधनों की कमी के बावजूद यह लाइब्रेरी मुरुप और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हो रही है:

  • नि:शुल्क तैयारी: यहाँ छात्र JPSC, UPSC, JSSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नि:शुल्क करते हैं.

  • पुस्तकों का संग्रह: पिछले दिनों चलाए गए ‘पुस्तक संग्रह अभियान’ के जरिए लाइब्रेरी को किताबें और फर्नीचर दान स्वरूप मिले हैं, लेकिन सरकारी अनुदान के नाम पर अब तक यहाँ कुछ नहीं पहुंचा है.

जीर्णोद्धार की सामूहिक मांग

लाइब्रेरी प्रबंधन समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भवन को ठीक नहीं किया गया, तो बारिश के मौसम में यहाँ बैठना मुश्किल हो जाएगा. जीर्णोद्धार की इस मांग में अध्यक्ष हेमसागर प्रधान के साथ शिक्षक आनंद महतो, शिबु प्रमाणिक, विकास प्रमाणिक, मृत्युंजय प्रमाणिक और अन्य सक्रिय सदस्य शामिल हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि जहाँ एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे शिक्षा केंद्रों का जर्जर होना दुर्भाग्यपूर्ण है. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस लाइब्रेरी की सुध कब लेता है.

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