चतरा. झारखंड के चतरा जिले के टंडवा वन क्षेत्र में अवैध रूप से कोयला ट्रांसपोर्टिंग कर रही कंपनियों के खिलाफ वन विभाग ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया है. बिना एनओसी (NOC) के वन भूमि का उपयोग कर बनाई गई सड़कों को विभाग ने जेसीबी चलाकर ध्वस्त कर दिया, जिससे मगध कोल परियोजना से होने वाला कोयला डिस्पैच पूरी तरह बाधित हो गया है.
DFO के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई
चतरा डीएफओ (DFO) के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने मासीलौंग और सराढू क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया.
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सड़क की घेराबंदी: टीम ने जेसीबी की मदद से उन सड़कों पर गहरे ट्रेंच (खाई) खोद दिए, जिनका उपयोग पिछले कुछ वर्षों से एनटीपीसी (NTPC) पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने के लिए किया जा रहा था.
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अवैध उपयोग: जांच में पाया गया कि ये सड़कें वन भूमि पर बनाई गई थीं, जिसके लिए संबंधित कंपनियों ने वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली थी.
कंपनियों में मची खलबली
रेंजर मुक्ति प्रकाश पन्ना ने बताया कि मगध कोल परियोजना से फौरेस्ट लैंड का उपयोग कर अवैध तरीके से कोयले का डिस्पैच किया जा रहा था. वन विभाग की इस अचानक कार्रवाई से सीसीएल (CCL) और कोयला धुलाई से जुड़ी ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों के बीच हड़कंप मच गया है. सड़क कटने के कारण मगध से चतरा जिले की ओर जाने वाला मुख्य डिस्पैच मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है.
टीम में शामिल सदस्य
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में वन रक्षी कार्तिक उरांव, सुनील उरांव, शत्रुघ्न चौबे, सतनारायण दास, मुकेश और निर्मल मुंडा शामिल थे. वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी बिना वैध अनुमति के वन क्षेत्र में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
फिलहाल, सड़क बाधित होने से करोड़ों रुपये के कोयले का परिवहन रुक गया है, जिससे बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.
