रांची में बिजली उपभोक्ताओं की नो-सुनवाई: JBVNL के कॉल सेंटर से लेकर फोरम तक चक्कर काट रहे लोग; सरेंडर मीटर पर आ रहा बिल, चालू पर गायब

झारखंड रांची

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और शिकायतों को झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. निगम की ओर से केंद्रीयकृत कॉल सेंटर और विभिन्न फोरम की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन धरातल पर उपभोक्ताओं को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है. जेबीवीएनएल की आंतरिक कैंप रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राजधानी में लोग या तो महीनों से बिजली बिल नहीं मिलने से परेशान हैं या फिर मीटर सरेंडर (बंद) करने के बाद भी उनके पास लगातार बिल भेजे जा रहे हैं. अधिकारियों और बिजली फोरम के आदेशों के बावजूद निचले स्तर के कर्मियों की लापरवाही के कारण शिकायतें महीनों से लंबित पड़ी हैं.

कैंप रिपोर्ट का खुलासा: बिल सुधार और मोबाइल लिंकिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें

निगम द्वारा जारी हालिया कैंप रिपोर्ट के आंकड़े बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली की पोल खोलते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज की गई कुल 1616 शिकायतों में से सर्वाधिक मामले बिलिंग गड़बड़ी से जुड़े हैं:

  • बिल सुधार: कुल 416 उपभोक्ताओं ने गलत बिलिंग की शिकायत दर्ज कराई है.

  • मोबाइल नंबर लिंकिंग: 559 उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनका मोबाइल नंबर बिजली खाते से नहीं जुड़ा है.

  • बिल न मिलना: 191 उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके घरों तक समय पर बिल ही नहीं पहुंच पा रहा है. इसके अलावा, विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) द्वारा दिए गए आदेशों का भी कनीय अधिकारियों (जूनियर इंजीनियर व लाइनमैन) द्वारा अनुपालन नहीं किया जा रहा है.

अजीबोगरीब मामले: सरेंडर मीटर पर ‘दनादन’ बिल, चालू मीटर पर सन्नाटा

राजधानी के विभिन्न डिवीजनों से दो बेहद अजीब और गंभीर मामले सामने आए हैं जो अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाते हैं:

उपभोक्ता विवरण एवं क्षेत्र समस्या का विवरण तकनीकी और वित्तीय आंकड़े

कंज्यूमर नंबर: ANAG 2424


एकाउंट नंबर: 11223653253 (रांची)

मीटर सरेंडर होने के बाद भी हर महीने व्हाट्सऐप पर लगातार बिजली बिल भेजा जा रहा है. उपभोक्ता द्वारा दो बार लिखित पत्र देने और व्यक्तिगत मुलाकात के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

• सरेंडर के दिन की रीडिंग: ₹23,597


• कुल बकाया राशि: ₹25,968


• उपभोक्ता की सुरक्षा राशि (Security Deposit): ₹27,800


(सुरक्षा राशि अधिक होने के बावजूद एडजस्टमेंट नहीं किया गया)

कंज्यूमर नंबर: 11221898522


मोरहाबादी (रिटायर्ड प्रोफेसर)

चालू मीटर होने के बावजूद फरवरी 2025 से ही घर पर कोई बिजली बिल नहीं आ रहा है. उपभोक्ता एकमुश्त भारी-भरकम बिल के डर से पार्ट पेमेंट करना चाहते हैं, ताकि आर्थिक बोझ न बढ़े, लेकिन विभाग बिल जनरेट नहीं कर रहा. महीनों से विभिन्न फोरम और अधिकारियों को पत्र लिखने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है.

बिलिंग एजेंसी का मनमाना रवैया; निदेशक स्तर से नाराजगी

रांची में बिजली आपूर्ति की बेहतर निगरानी और सुचारू संचालन के लिए कुल छह डिवीजन बनाए गए हैं. इन डिवीजनों में कार्यरत निजी बिलिंग एजेंसियों के मनमाने रवैए और लापरवाही पर जेबीवीएनएल के निदेशक स्तर से कड़ी नाराजगी दर्ज कराई गई है. सभी एजेंसियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे ‘हाउसहोल्ड विजिट’ (घर-घर जाकर मीटर रीडिंग) व्यवस्था में सुधार करें. साथ ही ऊर्जा मित्रों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे उपभोक्ताओं के परिसर में जाकर वास्तविक और त्रुटिहीन बिलिंग सुनिश्चित करें ताकि समय पर राजस्व का भुगतान हो सके.

₹400 करोड़ से अधिक राजस्व का लक्ष्य, 3.5 लाख स्मार्ट मीटर पर दारोमदार

बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं न मिलने के बीच झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने चालू वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये से अधिक के मासिक राजस्व संग्रह का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है.

रांची के छह प्रमुख डिवीजनों में लगाए गए करीब 3.5 लाख स्मार्ट मीटरों के जरिए हर महीने 80 से 90 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य है. निगम द्वारा तय किए गए श्रेणीवार बिलिंग लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • औद्योगिक उपभोक्ता (LTIS): 95 प्रतिशत बिलिंग दक्षता का लक्ष्य.

  • वाणिज्यिक उपभोक्ता (CS): 80 प्रतिशत बिलिंग का लक्ष्य.

  • घरेलू उपभोक्ता (शहरी): 65 प्रतिशत घरों तक सही बिलिंग पहुंचाना.

  • घरेलू उपभोक्ता (ग्रामीण): 50 प्रतिशत तक बिलिंग कवरेज सुनिश्चित करना.

संबंधित खबर: बिजली क्षेत्र के इस संकट के बीच राज्य के शैक्षणिक विकास को लेकर भी एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रशासनिक खींचतान और तकनीकी समन्वय की कमी के कारण झारखंड के लगभग 2.5 लाख अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) छात्र-छात्राओं की पोस्ट-मैट्रिक और अन्य छात्रवृत्ति (Scholarship) पिछले एक साल से पूरी तरह बंद है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

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